बहाई धर्म के ईश्वरदूत एवं अग्रदूत बाब के लेख बहाइयों द्वारा पावन लेख के रूप में सम्मानित समझे जाते हैं। बाब की लगभग सभी कृतियां १८४३ से लेकर ३० वर्ष की उम्र में उन्हें शहीद किए जाने अर्थात जुलाई १८५० के बीच, सात वर्षों की अवधि में रचित की गई थीं।
बाब के लेखों से चुने हुए अंश
बाब द्वारा प्रकट की गई पुस्तकों और पातियों से चुने हुए अंशों का एक संग्रह जिसमें ’कय्यमुल-अस्मा’ (जोसेफ के सूरा पर उनकी टीका), ’फारसी बयान’, ’दलील-ए-सबीह’ (सात प्रमाण), ’किताब-ए-अस्मा’ (नामों की पुस्तक), एवं अन्य अनेक लेख शामिल हैं।